UNSC में भारत का सख्त संदेश: बच्चों और स्कूलों पर हमले करने वालों को मिले कड़ी सजा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वाले लोगों को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह ठहराना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और युद्ध या संघर्ष जैसी परिस्थितियों में भी इस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में सामने आए चिंताजनक आंकड़े
यूएन महासचिव की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत ने बताया कि वर्ष 2025 में बच्चों के अधिकारों के 38,558 गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि हुई, जिनसे 24,174 बच्चे प्रभावित हुए। रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों पर हमलों में एक वर्ष के भीतर 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत ने कहा कि दुनिया भर में लगभग 47.3 करोड़ बच्चे संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं या विस्थापित हैं, जबकि 8.5 करोड़ से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। ये आंकड़े वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

भारत ने रखा अपना शिक्षा मॉडल
भारत ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। देश में 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को संविधान के तहत निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। भारत ने ‘दीक्षा’ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल माध्यमों से शिक्षा को निरंतर जारी रखा गया। भारत ने शरणार्थी और विस्थापित बच्चों की शिक्षा के लिए भी लगातार निवेश करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
स्थायी शांति की मजबूत नींव है शिक्षा
भारत ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं बल्कि स्थायी शांति और बेहतर भविष्य की आधारशिला है। संघर्ष और हिंसा से प्रभावित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने सभी देशों से अपील की कि वे नीतिगत प्रतिबद्धताओं को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करें ताकि हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके।